कृष्ण भगवान की फोटो: भगवान कृष्ण सनातन धर्म के सबसे लोकप्रिय और पूज्य देवताओं में से एक हैं। वे केवल एक देवता ही नहीं, बल्कि एक पूर्ण जीवन दर्शन हैं। भगवान कृष्ण का जीवन हमें यह सिखाता है कि संसार में रहते हुए भी कैसे धर्म, प्रेम और कर्तव्य का संतुलन बनाया जा सकता है। उनके व्यक्तित्व में बाल सुलभ चंचलता, युवा प्रेम की मधुरता और एक महान मार्गदर्शक की गंभीरता एक साथ दिखाई देती है।

भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था। उनका जन्म स्वयं में एक दिव्य लीला है, जिसका उद्देश्य अधर्म का नाश और धर्म की स्थापना था। जन्म के तुरंत बाद ही उन्हें गोकुल ले जाया गया, जहाँ उन्होंने बाल गोपाल के रूप में अनेक लीलाएँ कीं। माखन चोरी, गोपियों के साथ रासलीला और पूतना वध जैसी कथाएँ आज भी भक्तों के हृदय में विशेष स्थान रखती हैं। इन लीलाओं के माध्यम से भगवान कृष्ण ने यह दिखाया कि ईश्वर प्रेम और सरलता से भक्तों के निकट होता है।
राधा कृष्ण बगीचे में बांसुरी बजाते हुए | Shri Krishna Photo

युवा अवस्था में भगवान कृष्ण का राधा के साथ प्रेम आध्यात्मिक प्रेम का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है। राधा-कृष्ण का संबंध सांसारिक नहीं बल्कि आत्मिक और दिव्य है। राधा, कृष्ण की भक्ति का प्रतीक हैं, और कृष्ण, उस भक्ति को स्वीकार करने वाले परमात्मा। इसलिए राधा कृष्ण की पूजा केवल प्रेम की नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन की पूजा है।
बगीचे में बांसुरी बजाते भगवान कृष्ण और राधा की सुंदर राधा कृष्ण फ़ोटो
मोरपंख और बांसुरी के साथ श्रीकृष्ण | Shri Krishna Photo

भगवान कृष्ण का सबसे महत्वपूर्ण योगदान महाभारत के युद्ध के समय देखने को मिलता है। उन्होंने स्वयं शस्त्र नहीं उठाया, बल्कि अर्जुन के सारथी बनकर उसे गीता का उपदेश दिया। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कृष्ण ने कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग का गूढ़ रहस्य समझाया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को फल की चिंता किए बिना अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। यह उपदेश आज भी मानव जीवन को दिशा देने वाला ग्रंथ माना जाता है।
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कृष्ण भगवान की फोटो | Bhagwan Krishna Photo

भगवान कृष्ण का जीवन यह भी सिखाता है कि नीति और बुद्धि से बड़े से बड़े संकट का समाधान किया जा सकता है। उन्होंने कंस, शिशुपाल और दुर्योधन जैसे अधर्मी शक्तियों का अंत करके यह सिद्ध किया कि अहंकार और अन्याय का अंत निश्चित है। द्वारका के राजा के रूप में उन्होंने सुशासन, न्याय और समृद्धि का आदर्श प्रस्तुत किया।
राधा कृष्ण प्रेम | Radha Krishna Photo

भगवान कृष्ण की बांसुरी उनके व्यक्तित्व का एक विशेष प्रतीक है। बांसुरी यह दर्शाती है कि जब मनुष्य अपने अहंकार को खाली कर देता है, तब ईश्वर उसमें अपनी मधुर धुन बजाते हैं। मोरपंख, पीतांबर और नीलवर्ण स्वरूप भगवान कृष्ण को और भी आकर्षक बनाते हैं, जिससे वे हर वर्ग, हर उम्र के भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
बाल गोपाल श्रीकृष्ण | कृष्ण भगवान की फोटो

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आज के समय में भी भगवान कृष्ण की शिक्षाएँ उतनी ही प्रासंगिक हैं। तनाव, प्रतिस्पर्धा और भौतिकता से भरे जीवन में कृष्ण हमें संतुलन, धैर्य और आत्मविश्वास का मार्ग दिखाते हैं। वे सिखाते हैं कि जीवन में समस्याएँ आएँगी, लेकिन उनसे डरना नहीं चाहिए, बल्कि बुद्धि और धर्म के साथ उनका सामना करना चाहिए।
भगवान कृष्ण केवल मंदिरों में पूजे जाने वाले देवता नहीं हैं, बल्कि वे जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शक हैं। चाहे वह पारिवारिक जीवन हो, सामाजिक दायित्व हों या व्यक्तिगत संघर्ष—कृष्ण की सीख हर जगह उपयोगी है। इसलिए कहा जाता है कि जहाँ भक्ति है, वहाँ कृष्ण हैं, और जहाँ कृष्ण हैं, वहाँ जीवन में आशा और आनंद अवश्य होता है।







