Kashmir protests Iran support: पिछले कुछ हफ्तों में कश्मीर घाटी के कई हिस्सों, विशेषकर शिया बहुल क्षेत्रों जैसे बडगाम, मागाम और श्रीनगर के पुराने इलाकों में भारी विरोध प्रदर्शन देखे गए हैं। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से ईरान के प्रति एकजुटता प्रकट करने और इज़राइल व अमेरिकी नीतियों (विशेषकर डोनाल्ड ट्रंप के बयानों) के विरोध में किए जा रहे हैं।
प्रदर्शनकारी क्या भारत के नागरिक हैं ? | Kashmir protests Iran support
सबसे पहले इस भ्रम को दूर करना आवश्यक है कि ये प्रदर्शनकारी कौन हैं। ये सभी भारतीय नागरिक हैं। ये कश्मीर के स्थानीय निवासी हैं जो सदियों से इस मिट्टी का हिस्सा रहे हैं। किसी अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर विरोध जताना या किसी देश के प्रति धार्मिक सहानुभूति रखना उनकी नागरिकता पर सवाल नहीं खड़ा करता। भारतीय संविधान के तहत उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है, जिसका उपयोग वे वैश्विक मुस्लिम राजनीति से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखने के लिए कर रहे हैं।
ईरान का समर्थन और इज़राइल-ट्रंपका विरोध क्यों?
कश्मीर में ईरान के प्रति इस गहरे जुड़ाव के पीछे कई धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक कारण हैं:
1. धार्मिक और वैचारिक जुड़ाव : Kashmir protests Iran support
कश्मीर की शिया आबादी ईरान के सर्वोच्च नेता (Ayatollah) को अपना आध्यात्मिक मार्गदर्शक (Religious Guide) मानती है। हाल ही में ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर हुए हमलों और तनावपूर्ण स्थिति ने स्थानीय समुदाय को भावनात्मक रूप से आहत किया है। प्रदर्शनकारी ईरान को ‘इस्लाम का रक्षक’ और पश्चिमी साम्राज्यवाद के खिलाफ खड़ा होने वाला एकमात्र मज़बूत देश मानते हैं।
2. डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका की भूमिका :
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘ईरान विरोधी’ नीतियों और उनके कड़े बयानों ने आग में घी डालने का काम किया है। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन मध्य पूर्व (Middle East) में अस्थिरता पैदा कर रहा है और इज़राइल को खुली छूट दे रहा है। ट्रंप द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों और सैन्य धमकियों को कश्मीर में ‘मुस्लिम विरोधी’ राजनीति के रूप में देखा जाता है।
3. शिया मुस्लिम समुदाय के लिए ईरान का धार्मिक
दरअसल, शिया मुस्लिम समुदाय के लिए ईरान का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व काफी बड़ा माना जाता है। ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता Ali Khamenei को दुनिया भर के कई शिया मुसलमान आध्यात्मिक मार्गदर्शक की तरह देखते हैं। जब उनसे जुड़ी किसी घटना या हमले की खबर सामने आती है, तो यह समुदाय भावनात्मक रूप से प्रतिक्रिया देता है। इसी कारण कश्मीर में कई जगहों पर लोगों ने ईरान के समर्थन में नारे लगाए और इज़राइल व अमेरिकी नेतृत्व के खिलाफ प्रदर्शन किया
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4. Donald Trump और इज़राइल की नीतियों के खिलाफ नाराज़गी
कुछ प्रदर्शनों में लोगों ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और इज़राइल की नीतियों के खिलाफ नाराज़गी भी जाहिर की। इसके पीछे मुख्य कारण यह बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारी अमेरिका और इज़राइल को मध्य-पूर्व के संघर्षों के लिए जिम्मेदार मानते हैं। कई प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे इसे मुस्लिम देशों के खिलाफ अन्याय के रूप में देखते हैं, इसलिए वे ईरान के साथ एकजुटता दिखा रहे हैं।
हालांकि, यह भी सच है कि भारत सरकार की विदेश नीति अलग होती है और देश के सभी नागरिकों की राय एक जैसी नहीं होती। कश्मीर में हुए ये प्रदर्शन पूरे भारत की राय का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि यह एक विशेष समुदाय की भावनात्मक प्रतिक्रिया मानी जाती है। प्रशासन ने भी कई जगहों पर स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाए।
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क्या यह समुदाय भारत में लोगों के समर्थन में उतरता है?
आसान शब्दों में कहें तो ज़्यादातर कम्युनिटी, चाहे हिंदू हों या मुस्लिम, अपने ही कम्युनिटी को सपोर्ट करती दिखेंगी। लेकिन जब हिंदू कम्युनिटी पर ज़ुल्म होता है, तो बहुत कम लोग उनके साथ खड़े होते हैं। हाल ही में जब दिल्ली में ऐसी घटना हुई, तो उनमें से कोई भी सपोर्ट में नहीं खड़ा हुआ, जबकि कई जगहों पर हिंदू कम्युनिटी हमेशा इन लोगों के सपोर्ट में खड़ी रही है। तो, यहाँ बात यह है कि इंडिया में रहकर भी आप ईरान को सपोर्ट कर रहे हैं, जिसका देश पर बुरा असर पड़ रहा है। पहले आपको अपने देश के बारे में सोचना चाहिए। केंद्र सरकार को दूसरे देशों के बारे में सोचने का हक है, और वह उन्हें ध्यान से देख रही है और सोच रही है।







